جمعہ، 30 مئی، 2025

ज़िलहिज्जा के पहले दस दिन

 📢 ज़बरदस्त ऑफ़र – एक सुनहरा मौका!


दोस्तों जैसे आजकल दुकानदार और कंपनियाँ अपनी चीज़ों को बेचने के लिए बड़े-बड़े ऑफ़र देते हैं, वैसे ही हमारे दीन इस्लाम में भी कुछ खास दिन और रातें हैं, जब अल्लाह तआला अपने बंदों को ज़्यादा नेकी, सवाब और बरकत पाने का मौका देता है।


इन खास मौकों में दो सबसे अहम हैं:

⭐ रमज़ान के आखिरी दस दिन

⭐ ज़िलहिज्जा के पहले दस दिन

क़ुरआन और हदीस* में ज़िलहिज्जा के पहले दस दिनों की बड़ी फ़ज़ीलत बताई गई है। हदीस में आता है कि इन दिनों में किया गया कोई भी नेक काम आम दिनों से कई गुना ज़्यादा अल्लाह को पसंद आता है — यहाँ तक कि ये दिन *जिहाद* से भी अफ़ज़ल बताए गए हैं, सिवाय उस इंसान के जो सब कुछ कुर्बान कर दे।


🕌 इन दिनों में आप क्या करें?


✅ *रोज़े रखें, खासतौर पर 9 ज़िलहिज्जा (यौम-ए-अरफ़ा) का रोज़ा  जो एक साल पिछले और एक साल अगले गुनाहों का कफ्फ़ारा बनता है।


✅ *अल्लाह का ज़िक्र करें जैसे:

* सुब्हान अल्लाह*

* अल्हम्दु लिल्लाह*

* ला इलाहा इल्लल्लाह*

* अल्लाहु अकबर*


✅ तकबीर-ए-तशरीक* पढ़ें  9 ज़िलहिज्जा की फज्र से लेकर 13 ज़िलहिज्जा की मगरिब तक, हर फर्ज़ नमाज़ के बाद।


✅ *क़ुरआन की तिलावत करें, **दरूद शरीफ़ पढ़ें, और **अल्लाह की खूब याद करें*।


📌 याद रखें — ये इबादतें सिर्फ हाजियों या क़ुर्बानी करने वालों के लिए नहीं, बल्कि *हर मुसलमान* के लिए हैं — चाहे वो अमीर हो या ग़रीब, मर्द हो या औरत।


अफ़सोस की बात है कि ज़्यादातर लोग इन फज़ीलत भरे दिनों को नजरअंदाज़ कर देते हैं।

चलो इस बार हम सब मिलकर इस *रूहानी ऑफ़र* का पूरा फ़ायदा उठाएँ और अपनी आख़िरत को संवारें।

डॉ. मुबस्सिर उर रहमान क़ासमी


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