- डॉ. मुबस्सिर रहमान
इस्लाम ने हमें बाज़ार में चलने-फिरने, खरीद-बिक्री करने और लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करने के आदाब
सिखाए हैं। आइए, इन अहम बातों को जानते
हैं।
• बाज़ार में जाएँ तो सलाम करें।
• लाइन में रहें और अपनी बारी का इंतज़ार करें।
• बिना ज़रूरत ऊँची आवाज़ में बात न करें।
• शोर-शराबा न करें।
• खरीदने वाला और बेचने वाला, दोनों प्यार और नरमी से पेश आएँ।
• लेन-देन में अच्छा अख़लाक़ रखें।
• जब सच में खरीदना हो तभी दुकान पर जाएँ।
• सिर्फ़ समय बिताने के लिए दुकानदार को परेशान न
करें।
• खरीदारी से पहले तय कर लें कि क्या लेना है।
• बिना ज़रूरत बाज़ार में समय बर्बाद न करें।
• दुकानदार पर झूठ का इल्ज़ाम न लगाएँ।
• बिना वजह सामान में कमी न निकालें।
• दुकानदार की इज़्ज़त करें।
• सामान खरीदें या चुपचाप वापस आ जाएँ।
• दुकान खुलने के समय ही खरीदारी करें।
• दुकान बंद होने के समय दुकानदार को परेशान न करें।
• बच्चों को दुकान में शोर मचाने न दें।
• उन्हें सामान से खेलने न दें।
• रास्ते और बाज़ार के आदाब का ध्यान रखें।
• सलाम का जवाब दें।
• नज़रें नीची रखें।
• किसी को तकलीफ़ न पहुँचाएँ।
• औरतें सड़क के किनारे चलें।
• मर्द औरतों के लिए आसानी पैदा करें।
• औरतें पर्दा और हया का ख़याल रखें।
• बात हमेशा नरमी और अदब से करें।
• कपड़े नापने के बहाने हाथ या पैर न खोलें।
• ट्रायल रूम में भी हिजाब न उतारें।
• ज़्यादा भीड़ के समय खरीदारी से बचें।
• दाम को लेकर ज़्यादा बहस न करें।
• दुकानदार से झगड़ा न करें।
• नौजवान बिना ज़रूरत बाज़ारों में न घूमें।
• खरीद-बिक्री की वजह से नमाज़ और अल्लाह की याद से
गाफ़िल न हों।
• सड़क पार करने वालों का ख़याल रखें।
• बुज़ुर्गों और बच्चों की मदद करें।
• गाड़ी ग़लत जगह पार्क न करें।
• रास्ता बंद न करें।
• खुले बाज़ार में खाते-पीते न फिरें।
• मस्जिद में खरीद-बिक्री की बातें न करें।
• खरीदारी करते समय अपने देश, अरब और इस्लामी देशों की चीज़ों को तरजीह दें।
• सिर्फ़ ब्रांड और दिखावे से प्रभावित न हों।
• फ़िज़ूल ख़र्ची से बचें।
• बाज़ार को साफ़-सुथरा रखें।
• कूड़ा ज़मीन पर न फेंकें।
• सोना और चाँदी शरीअत के मुताबिक़ खरीदें।
• सूद वाले लेन-देन से बचें।
• शक वाली स्कीमों और इनामी ड्रॉ से दूर रहें।
• व्यापारी मुनासिब मुनाफ़े पर संतोष करें।
• झूठी सेल और नकली छूट से बचें।
• धोखे और फ़रेब का कारोबार न करें।
• हराम चीज़ों का कारोबार न करें।
• झूठी बोली लगाकर दाम न बढ़ाएँ।
• सामान में कोई कमी हो तो उसे न छिपाएँ।
• सामान का असली देश या गुणवत्ता बदलकर धोखा न दें।
• जुमे की दूसरी अज़ान के बाद खरीद-बिक्री न करें।
• ऐसी चीज़ न बेचें जो आपकी मिल्कियत में न हो।
• तौल और माप में कमी न करें।
• जमाखोरी से बचें।
• साझेदारी की चीज़ बेचने से पहले अपने साझेदार को
मौका दें।
• यतीम का माल नाजायज़ तरीके से न खाएँ।
• रिश्वत और जुए से दूर रहें।
• चोरी और बेईमानी न करें।
• कर्ज़ लेकर उसे वापस न करने की नीयत न रखें।
• किसी का हक़ न मारें।
• मिली हुई खोई चीज़ को छिपाएँ नहीं, उसका ऐलान करें।
• मिलावट, धोखा और जालसाज़ी से बचें।
• सामान बेचने के लिए झूठी क़सम न खाएँ।
• नाजायज़ मुनाफ़ाख़ोरी न करें।
अल्लाह तआला हमें इस्लामी आदाब के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारने और हर काम में सच्चाई,
अमानतदारी और अच्छे अख़लाक़ अपनाने की तौफ़ीक़ अता
फ़रमाए। आमीन।

