جمعرات، 16 جولائی، 2026

बाज़ार में चलने-फिरने, खरीद-बिक्री करने के आदाब

 


- डॉ. मुबस्सिर रहमान 

इस्लाम ने हमें बाज़ार में चलने-फिरने, खरीद-बिक्री करने और लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करने के आदाब सिखाए हैं। आइए, इन अहम बातों को जानते हैं।

•             बाज़ार में जाएँ तो सलाम करें।

•             लाइन में रहें और अपनी बारी का इंतज़ार करें।

•             बिना ज़रूरत ऊँची आवाज़ में बात न करें।

•             शोर-शराबा न करें।

•             खरीदने वाला और बेचने वाला, दोनों प्यार और नरमी से पेश आएँ।

•             लेन-देन में अच्छा अख़लाक़ रखें।

•             जब सच में खरीदना हो तभी दुकान पर जाएँ।

•             सिर्फ़ समय बिताने के लिए दुकानदार को परेशान न करें।

•             खरीदारी से पहले तय कर लें कि क्या लेना है।

•             बिना ज़रूरत बाज़ार में समय बर्बाद न करें।

•             दुकानदार पर झूठ का इल्ज़ाम न लगाएँ।

•             बिना वजह सामान में कमी न निकालें।

•             दुकानदार की इज़्ज़त करें।

•             सामान खरीदें या चुपचाप वापस आ जाएँ।

•             दुकान खुलने के समय ही खरीदारी करें।

•             दुकान बंद होने के समय दुकानदार को परेशान न करें।

•             बच्चों को दुकान में शोर मचाने न दें।

•             उन्हें सामान से खेलने न दें।

•             रास्ते और बाज़ार के आदाब का ध्यान रखें।

•             सलाम का जवाब दें।

•             नज़रें नीची रखें।

•             किसी को तकलीफ़ न पहुँचाएँ।

•             औरतें सड़क के किनारे चलें।

•             मर्द औरतों के लिए आसानी पैदा करें।

•             औरतें पर्दा और हया का ख़याल रखें।

•             बात हमेशा नरमी और अदब से करें।

•             कपड़े नापने के बहाने हाथ या पैर न खोलें।

•             ट्रायल रूम में भी हिजाब न उतारें।

•             ज़्यादा भीड़ के समय खरीदारी से बचें।

•             दाम को लेकर ज़्यादा बहस न करें।

•             दुकानदार से झगड़ा न करें।

•             नौजवान बिना ज़रूरत बाज़ारों में न घूमें।

•             खरीद-बिक्री की वजह से नमाज़ और अल्लाह की याद से गाफ़िल न हों।

•             सड़क पार करने वालों का ख़याल रखें।

•             बुज़ुर्गों और बच्चों की मदद करें।

•             गाड़ी ग़लत जगह पार्क न करें।

•             रास्ता बंद न करें।

•             खुले बाज़ार में खाते-पीते न फिरें।

•             मस्जिद में खरीद-बिक्री की बातें न करें।

•             खरीदारी करते समय अपने देश, अरब और इस्लामी देशों की चीज़ों को तरजीह दें।

•             सिर्फ़ ब्रांड और दिखावे से प्रभावित न हों।

•             फ़िज़ूल ख़र्ची से बचें।

•             बाज़ार को साफ़-सुथरा रखें।

•             कूड़ा ज़मीन पर न फेंकें।

•             सोना और चाँदी शरीअत के मुताबिक़ खरीदें।

•             सूद वाले लेन-देन से बचें।

•             शक वाली स्कीमों और इनामी ड्रॉ से दूर रहें।

•             व्यापारी मुनासिब मुनाफ़े पर संतोष करें।

•             झूठी सेल और नकली छूट से बचें।

•             धोखे और फ़रेब का कारोबार न करें।

•             हराम चीज़ों का कारोबार न करें।

•             झूठी बोली लगाकर दाम न बढ़ाएँ।

•             सामान में कोई कमी हो तो उसे न छिपाएँ।

•             सामान का असली देश या गुणवत्ता बदलकर धोखा न दें।

•             जुमे की दूसरी अज़ान के बाद खरीद-बिक्री न करें।

•             ऐसी चीज़ न बेचें जो आपकी मिल्कियत में न हो।

•             तौल और माप में कमी न करें।

•             जमाखोरी से बचें।

•             साझेदारी की चीज़ बेचने से पहले अपने साझेदार को मौका दें।

•             यतीम का माल नाजायज़ तरीके से न खाएँ।

•             रिश्वत और जुए से दूर रहें।

•             चोरी और बेईमानी न करें।

•             कर्ज़ लेकर उसे वापस न करने की नीयत न रखें।

•             किसी का हक़ न मारें।

•             मिली हुई खोई चीज़ को छिपाएँ नहीं, उसका ऐलान करें।

•             मिलावट, धोखा और जालसाज़ी से बचें।

•             सामान बेचने के लिए झूठी क़सम न खाएँ।

•             नाजायज़ मुनाफ़ाख़ोरी न करें।

अल्लाह तआला हमें इस्लामी आदाब के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारने और हर काम में सच्चाई, अमानतदारी और अच्छे अख़लाक़ अपनाने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

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बाज़ार में चलने-फिरने, खरीद-बिक्री करने के आदाब

  - डॉ. मुबस्सिर रहमान  इस्लाम ने हमें बाज़ार में चलने-फिरने , खरीद-बिक्री करने और लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करने के आदाब सिखाए हैं। आइए , ...